Sunday, May 30, 2021

मगर हम भी वो कश्ती है किनारा ढूंढ़ लेते हैं

मगर हम भी  वो कश्ती हैं किनारा ढूंढ़ लेते हैं

कई आंधी भी देखी है,
कई तूफां भी देखे है,
मगर हम भी वो कश्ती हैं किनारा ढूंढ़ लेते हैं।

वक्त भी आजमाता है,
जिंदगी खेलती हमसे,
मगर हम वो नहीं हैं जो, यूंही हार मानजाते हैं।

लड़ेगें हम भी जब तक ये,
आख़री सांस है अपनी,
हम भी वो है जो हर हाल में, फतेह मैदान करते हैं।

गर गमों की भी कोई आंधी जो आजाए,
हमे क्या खोफ़ है उनसे,
हमने कई तूफां भी झेले हैं।

जो खोना था खो चुके हैं,
बचा ही क्या है अब हमपर,
हमे क्या फ़िक्र उसकी है, जो खोने से डरेंगे हम।

खड़े है भीड़ में हम तो,
मगर फिर भी अकेले हैं,
हमे समझा नहीं कोई, यंहा समझाइश के मेले हैं।

कोई क्या हमको तोड़ेगा,
है इतना दम किसी में क्या,
समेटे हैं हजारों गम, मगर मुस्कुरा ही देते हैं।

Shikha Sharma

Thursday, May 27, 2021

तेरी लाडो हूं मैं तेरा अभिमान हूं बाबा

 तेरी लाडो हूं मैं तेरा अभिमान हूं बाबा

जलाकर खाक कर दुंगी,
मै ऐसी ख्वाहिशों को मेरे बाबा। 

तेरे माथे पे एक भी सिकन,
आने ना दुं मेरे बाबा।

मेरे कारण तेरा सर मैं,
कहीं झुकने ना दूं बाबा।

त्यागदुंगी मैं अपनी ऐसी खुशियों को,
जो खुशियां आयेंगी तेरी  खुशियों के आड़े मेरे बाबा।

तू माने या ना माने पर,
तुझे मैं प्रेम करती हूं मेरे बाबा।

तेरे हर संघर्ष में,
मै तेरे साथ हूं बाबा

ना कोई है ना कोई था,
कभी तुझ से बढ़कर मेरे बाबा।

तेरी शान ही तो है,
मेरा अभिमान ओ बाबा।

दिखावे के प्रेम की आदत नहीं मेरी,
तेरी लाडो हूं मैं तेरा अभिमान हूं बाबा।

Shikha Sharma

Tuesday, May 25, 2021

याद बहुत आती हो नानी

 

याद बहुत आती हो नानी

तुमसे प्यारा तुमसे अच्छा,
अब कोई नहीं यहां पर नानी। 

सब खोए अपनी दुनिया में,
प्रेम तुम्हारे जैसा कोई नहीं करता है नानी। 

अब स्वाद नहीं कहीं भी,
जो स्वाद तुम्हारे हाथो में था। 

गोद में बैठे बैठे दिन बीता करते थे नानी,
फरमाइश पर मेरी पल में पकवान बना लाती थी नानी। 

खेल खेल में हमने तुम्हारी,
ना जाने कितनी साड़ी फाड़ी। 

वो तेरी साड़ी का झूला,
अब भी याद आता है नानी। 

गुड्डा गुडिया तुमसे बनवाते,
परेशान तुम्हें करते थे नानी। 

सारा दिन उत्पात मचाते,  
फिर भी कुछ ना कहती थी नानी। 

अब वो दिन बापस कभी भी,
ना आयेंगे फिर से नानी। 

पर दिल में हमारे बसती हो तुम,
याद बहुत आती हो नानी। 

Shikha Sharma

कोरोना में जीवन संघर्ष

 

कोरोना में जीवन संघर्ष

तेरी धरती पे मेरे ऐ खुदा,
जीवन ये मुश्किल हो रहा! 

हर आंख नम् सी है यहां,
खुशियों का खो गया पता!

सांसों का व्यापार कर रहा,
तेरा इंसा हेवां बन रहा!

कहीं भुख से बिलख रही नन्ही सी कोई जान है,
कहीं राह में ही छोड़ता अपने ही मां  बाप को!

चलना सिखाया था जिसने,
उड़ने की दी थी आजादी!

तेरा इंसा भुल गया है अब,
उन देवताओं की कुर्बानी!

कहीं हारती है जिंदगी,
कहीं लड़ रही है मौत से!

कल  कैद थे पंछी यंहा,
आज इंसा ही कैद है!

माना खुदा इंसा तेरा बेरहम बेईमान है,
पर तेरे रहमो करम पर पड़े हम तेरे ही तो लाल है!

अब करदे माफ गुनाह हमारे,
लौटा दे फिर से खुशहाली!

Shikha Sharma

वक्त मेरा भी आयेगा

 

वक्त मेरा भी आएगा

टूटे हुए सपनों को आज,
फिर से जोड़कर देखा है!

जो खो गए थे रास्ते आज,
फिर उन पर चलकर देखा है!

मंजिल तो बहुत दूर है मगर,
फिर भी हौसला बुलंद कर के देखा है!

वक्त लगेगा तो क्या हुआ,
एक दिन वक्त मेरा भी आएगा!

Shikha Sharma

नारी का अस्तित्व

 

नारी का अस्तित्व

है अभिमान मुझे भी मै एक नारी हूं,
मै शक्ति हूं मै दुर्गा हूं मै लक्ष्मी महाकाली हूं!

अन्नपूर्णा सरस्वती मै मै सीता सी नारी हूं,
जो ना होता अस्तित्व मेरा तो राम की क्या मर्यादा होती!

जो ना होती राधा रानी,
मोहन की बंसी में भी वो तान ना होती!

मीरा सी जोगन ना होती,
भक्ति का प्रमाण ना होता!

यशोदा सी जो माता ना होती ,
ममता की पहचान ना होती!

प्रगट ना होती जनक सुता तो,
मिथिला की पहचान ना होती!

Shikha Sharma

वीरांगनाएं

 

वीरांगनाएं


अब चांद नहीं बनना मुझको सूरज के जैसा बनना है,
जो आंख मिलाऊ दुश्मन से तो जलाकर उसको खाक करूं!

रण में गरजू महाकाली सी दुश्मन का सर्वनाश करूं,
सर जो कटे रण में तो तिरंगा ऊचा होता है!

जो काटूं सर मै दुश्मन के तो लहरा लहरा के केहता है,
यह भूमि नहीं सिर्फ वीरों की यहां वीरांगनाएं भी रहती हैं,
यहां वीरांगनाएं भी रहती हैं!

Shikha Sharma



सरहद के वीर

सरहद के वीर  अगर सरहद पे तुम हो तो,  यहां महफ़ूज़ हम सब हैं।  ना दहशत है कोई दिल में,  ना कोई खौफ़ है मन में।  हमारा ताज है तुमसे, वतन की शा...