कृष्ण जन्मोत्सव गीत
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर,
बरसे हैं देखो मेघ गगन से,
झूमे है हरियाली।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
भादों की वो पावन रूत है,
कृष्ण पक्ष की तिथि अष्टमी,
जन्मे हैं कृष्ण कन्हाई।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
टूट गई है वेडी सारी,
मूर्छित भय हैं द्वार पाल सब,
खुल गए सारे ताले।
हो काली काली छाई रेे,
घटा अंबर पर।
माया पति की माया देखो,
कैसे कैसे खेल रचाए,
जगत का पलानहारा।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
वसुदेव चले हैं शीश पे लेकर,
मयापति के रूप को लेकर,
माया गुण गोपाला।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
देखो यमुना व्याकुल होती,
स्वामी के में चरण पखारूं,
हट ये कैसी ठानी।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
यमुना की हट देख कन्हैया,
झुकता है देखो जग का खिबैया,
होले चरण बढ़ाए।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
भीगत देखे जो श्री हरी को,
शेषनाग ने दी है छईया,
गोकुल कृष्ण पधारे।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
यशोदा जायो है नंदलाला,
गोकुल में है आंनद छाया,
आयो है गोपाला।
हो काली काली छाई रे,
घटा अंबर पर।
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Shikha Sharma