सोने का पिंजरा
मै तेरे आंगन की चिड़िया,
आजाद फिरूं इस अंबर में।
तु है इस बगिया का माली,
मै हुं जैसे कोई फुलबारी।
बचपन से एक सुनी कहानी,
आयेगा एक दिन राजकुमार।
मुझको सुंदर से महलों में,
ले जाएगा वो राजकुमार।
पर जिसको तुमने महल कहा,
वो सोने का पिंजरा निकला।
रहती कैद में तेरी गुडिया,
अब सोने के पिंजरे में।
सजी धजी सी रहती हुं मैं,
इन सोने के गहनों में।
पर तु क्या जाने मेरे बाबा,
ये तो सोने की जंजीरें है।
राजकुमार मिला महलों का,
पर वो दिल का ना शहजादा था।
मेरी कल्पनाओं में तो बाबा,
मैने चाहा घरौंदा दिल का था।
महल की इन ऊची दीवारों में,
वो प्यार कहीं ना बसता है।
होते हुए पंख अब ये पंछी,
इस सोने के पिंजरे में रहता है।
Shikha Sharma
वाह क्या बात है गज़ब की लाइन पेस की है धन्य है आपकी कलम
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद 🙏
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