मंहगाई की मार युवा बेरोजगार
मंहगाई ने तो,
आम जनता का दम तोड़ा,
मुश्किल हुआ है जीना,
अब आम जनता का।
दौड़ लगाए देखो,
पेट्रोल डीजल ये,
छलांग मारता है,
अब सरसों का तेल भी।
ऐसी महामारी आई,
बन्द करोबार हुआ,
कुछ ना समझ आए,
कैसा ये हाल हुआ।
भर भर थक गए,
फॉर्म सरकारी ये,
रोजगार मिला ना,
बेरोज़गारी मारे है।
पढ़ लिख कर ऐसे,
सपने सजाए थे,
बनना था कुछ और,
कुछ बन बैठे हैं।
पढ़ पढ़ डिग्रियां,
हमने इकट्ठी की,
आज लगाने को,
ठेला मजबूर हैं।
दर दर भटके हैं,
खूब सर पटके हैं,
अब भी हम,
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Shikha Sharma
Jay ho
ReplyDeleteDhanyawad
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