Wednesday, July 14, 2021

ममता की छांव

 ममता की छांव

मां फिर से मुझको अपने,
आंचल की छांव देदे,
मुझको डरा रहीं हैं,
दुनिया की तीखी नजरें।

मेरे मन पे बोझ सा है,
और दिल में दर्द भी है,
तुफान सा उमड़ता,
इसे शांत तु करादे।

ममता में तेरी मां मै,
इस तरह खो जाऊं,
फिर और कुछ मेरी मां,
मुझे याद ही ना आए।

हर फ़िक्र से मेरी मां,
बेफिक्र मुझे करदे,
मै भुल जाऊं सबकुछ,
मुझे बाहों में तु भर ले।

तु डांटती भी है तो,
होता है प्यार तेरा,
पर मुझको सारी दुनिया,
क्यों आंख ही दिखाए।

बस तेरा प्यार सच्चा,
मां मै ये जानती हुं,
वरना तो यहां सबके,
दो चेहरे नज़र आएं।

तेरी ममता है ठंडी छाया,
और धूप दुनिया सारी,
मुझको ये छांव देदे,
मुझे धूप से बचाले।

Shikha Sharma

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