कई अपने हमारे हैं
घिरे हम चारों ओरों से,
कई दुश्मन हमारे हैं,
हमे चोक्कन्ना रहना है,
कई अपने हमारे हैं।
किया क्या हमने ऐसा है,
जो हम आंखों में चुभते हैं,
हमारा दोष आखिर क्या,
हम ही अनजान इससे है।
जो कल तक कुछ ना करते थे,
बड़े अच्छे लगते थे,
कदम आगे बढ़ाया तो,
बुरे हम आज लगते हैं।
अभी खामोश हैं हम तो,
हमारी जंग जारी है,
मिलेगी जीत जिस दिन तो,
हमारी जीत बोलेगी।
जिन्हे अपना समझते थे,
मोखोटा वो तो पहने थे,
बड़े हम नासमझ थे पर,
समझ अब हमको आया है।
Shikha Sharma
Buhut sundar bichar 🙏
ReplyDeleteDhanyawad
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteThanks
DeleteThanks
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