मुझे ना कोख में मारो
मुझे ना कोख में मारो,
मुझे भी जीने दो पापा,
नहीं देखी अभी दुनिया,
मुझे भी देखने दो ना।
क्यों दादी रूठी बैठी हो,
तुम्हारी ही तो पोती हुं,
तुम्हारी गोद में दादी,
मुझे भी खेलने दो ना।
मै तेरी कोख में हुं मां,
दया क्या तुझको ना आती,
मै तेरी ही तो लाडो हुं,
तेरी नन्ही सी शहजादी।
ये कैसी नफरतें बोलो,
मै भी संतान तुम्हारी हुं,
मिलेगा मारके मुझको,
बताओ ना तुम्हें भी क्या।
चलो माना में बेटी हुं,
मगर बेटे से ना कम हुं,
मुझे मौका तो दो पापा,
तुम्हारी शान बन जाऊं।
सुना है मैने ये पापा,
पूजते तुम तो देवी को,
वही देवी स्वरूपा हुं,
पाप क्यों ये कमाते हो।
रखे व्रत तुमने नवरात्रे,
किया था कन्या पूजन भी,
जो बेटी को ही मारोगे,
कहां से पाओगे कन्या।
Shikha Sharma
Buhut sundar line
ReplyDeleteDhanyawad 🙏
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