वैलेंटाइन की टूटी आश सावन में जागी फिर से (हास्य कविता)
प्रेम पत्र से काम चला ना,
जिनका वैलेंटाइन में,
बेलपत्र से काम चला रहे,
सावन के त्योहार में।
लगाकर चंदन मना रहे ये,
प्यारे भोले बाबा को,
सैटिंग पहले जो हो ना पाई,
अब भोले तुम करवादो।
सैटिंग भोले तो करवादे,
पर इसमें एक बाधा है,
राखी का त्यौहार भी प्यारे,
सावन में ही आता है।
बैंड चाहिए फ्रेंडशिप का,
या राखी की डोरी तुझको,
मै ना जानु बालक ये,
डिसाइड करना है तुझको।
तुझको हर पांच मिनट में,
सच्चा प्यार हो जाता है,
दिल है तेरा आखिर ये,
या कोई ट्रेन का डिब्बा है।
मुझको तू माफ करदे बच्चा,
इतनी सैटिंग मै ना करवा पाऊंगा,
कोई एक डिसाइड करले तु,
तो शायद मै कुछ कर पाऊंगा।
Shikha Sharma
Gzb
ReplyDeleteDhanyawad
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