Wednesday, July 7, 2021

प्रेम मनोरथ

 प्रेम मनोरथ

ना चाहूं मै महल कोई,
ना चाहूं मै कोई गहना,
मेरा सम्मान तुम करना,
तुम ही तो हो मेरा गहना।

सजाऊंगी के जब भी में,
कभी ये मांग मेरी तो,
वफा के रंग से युंही,
सदा तुम मांग ये भरना।

मेरी सांसों में तो अब बस,
तुम्हारा नाम रहता है,
तुम्हारे दिल में भी मुझको,
जरा स्थान दे देना।

तुम्हारे गम मुझे देना,
मेरी खुशियां भी ले लेना,
मगर दुख सुख में तुम मेरे,
सदा साथी बने रहना।

उम्र ढलते ही एक दिन ये,
बदलजाएगी सूरत भी,
मगर सीरत से तुम मेरी,
चाहत सदा रखना।

नहीं हुं मैं बहुत ही,
खूबसूरत लेकिन,
मेरे मन की ये सुंदरता,
निगाहों में सदा रखना।

कभी दरिया जो अश्कों का,
बहेगा मेरी आंखों से,
सुनाकर तुम कोई किस्सा,
मुझे यूंही हंसा देना।

चलो माना ये राहें हैं,
मोहब्बत की बड़ी मुश्किल,
जो थामो हाथ तुम मेरा,
तो मंजिल आसान हो जाए।

मेरे गीतों में ग़ज़लों में,
तुम्हारा जिक्र होता है,
मेरे गीतों को बस तेरा,
एक साज़ मिल जाए।


इस काव्य गीत का यूट्यूब वीडियो देखने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇
Shikha Sharma 

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