बाबा की गुडिया
ऊची भरूंगी मै तो,
ऐसी उड़ान एक दिन,
देखेगी सारी दुनिया,
बाबा मुझे भी उस दिन।
हुं मजबूर आज लेकिन,
कल तो सवेरा होगा,
छ्ट जाएगा अंधेरा,
रोशन उजाला होगा।
एक दिन ये तेरी गुडिया,
आसमान भी छुएगी,
देखेगा तु भी एक दिन,
तेरी लाठी मै बनुगी।
मिटादुंगी गम सारे,
तेरी खुशियां मै बनुंगी,
मै गम का साया तुझपे,
पड़ने कभी ना दुंगी।
जिस दिन भी मै ओ बाबा,
होजाऊंगी सफल तो,
वादा है मेरा तुझसे,
तेरे गम समेट लूंगी।
हर संघर्ष मै करूंगी,
तकदीर से लडुंगी,
तेरे लिए मै बाबा,
हर गम भी सह लूंगी।
हारूंगी मै ना हिम्मत,
जब तक रहेंगी सांसे,
हालात के मै आगे,
डट के खड़ी रहूंगी।
ना सोचना कभी ये,
के कुछ ना मै करूंगी,
बिटिया हुं तेरी लेकिन,
तेरा बेटा मै बनुंगी।
बस साथ हो तेरा तो,
आसान राहें होंगी,
जो सर पे हाथ हो तो,
मंजिल मुझे मिलेगी
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Shikha Sharma
बहुत भावपूर्ण सुंदर कबिता! लेकिन एक सलाह माता पिता के लिये... आपकी बिटिया अगर इस कविता जैसे ही भाव और श्रद्धा आपके लिए रखती हो,तो वाक़ई आप बहुत भाग्यशाली हैं, लेकिन एक बात का ध्यान ज़रूर रखें, आपकी बिटिया कहीं आपके प्रति प्रेम श्रद्धा और आपकी अपेक्षाओं के boajh तले इतना न दब जाए कि उसका अपना जीवन आपको सुख और खुशी देने में दुखद बन जाये! माता पिता का फर्ज होता है बच्चे की देखभाल और पालन करना क्योंकि उसको जन्म दे के आप उस जीव पर कोई एहसान नही कर रहे होते हैं बल्कि स्वयं की खुशी और सांसारिक मोह और स्वार्थ उसका कारण होता है इसलिए कभी बदले में कोई अपेक्षा न रखे, हृदय में शांति बनी रहेगी! बच्चे को संस्कार दे लेकिन अपेक्षाओं का बोझ नही! जो मिलना है पूर्व जन्मों के प्रारब्ध अनुसार स्वतः मिलेगा!
ReplyDeleteजी आपका बहुत बहुत धन्यवाद ये सिर्फ मेरी भावनाएं है मुझ पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं है आप सभी इसी तरह अपना स्नेह एवम् आशीर्वाद बनाए रखे 🙏
ReplyDeleteBuhut hi sundar bichar 🙏
ReplyDeleteDhanyawad 🙏
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