Thursday, December 30, 2021

श्री शिव रुद्राष्टकम lyrics

नमामीशमीशान निर्वाण रुपं,
विभुुं व्यापकं ब्रह्म वेद स्वरूपं
निजम् निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहम्,
चिदाकाशमाकाश वाशे भजेहम्।।

निराकार ओमकार मूलं तुरीयम्,
गीरागान् गोति तमिशम् गीरीशम्,
करालम् महाकाल कालम् कृपालुम्, 
गुणागार संसार पारम् ना तोहऽम्।।

तुषाराद्री संकाश गौरम् गम्भीर,
मनोभुत् कोटी प्रभाश्री शरीरम्, 
स्पुरनमौली कल्लौलनी चारूगंगा, 
लासद् भाला वालेन्दु कंठे भुजंगा।।

चलत् कुडंलम् वेरू सुनैत्रम् विशालम्,
प्रशनान् नानम् नीलकंठम् दयालुम्, 
मृगदीशा चर्मावरम् मुडंमालम,
प्रियं शंकरम् सर्व नाथं भजामी।।

प्रचंडम् प्रकशटम् प्रगलभम् परेशम्,
अखण्डं अजं भानुकोटी प्रकशं,
त्रैशुल निर्मूल शूलापनिम्, 
भजेहम् भवानी पतिंभावगामयम।।

कलातीत् कल्याण कल्पंतकारी,
सदा सच्चिदानंद दाता पुरारी,
चिदानदं सनदोहा मोहापाहरी, 
प्रसिदा प्रसलदा प्रभौमन्मथारी।।

नायावद उमानाथ पादारविदं, 
भजनतिता लोके परेवानरानम्,
नातावत् सुखं शांति सन्ताप नाशम्,
प्रशलदा प्रभौ सर्व भूता दिवाशम्।।

ना जानामि योगम् जपम् नैवपुजम्,
नातोहम् सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यम,
जरा जन्म दुख्खौ तत्पया मानम्, 
प्रभौ पाहिआपन नमिशा सः शम्भौः।।


रूद्राष्टकं इदं प्रोक्तं विप्रेण हर्षोतये
ये पठन्ति नरा भक्तयां तेषां शंभो प्रसीदति।।

इति श्रीगोस्वामीतुलसीदासकृतं श्रीरुद्राष्टकम सम्पूर्णम्


Monday, December 27, 2021

माँ पार्वतीजी की गणपति जी को सीख (बच्चों के लिए प्रेरणा दायक कहानी)


गणपति जी की शरारतों के कई किस्से प्रचलित हैं 
आज मैं उन्हीं की शरारत का एक किस्सा आपको बताती 
हुं।

हम सभी जानते हैं गणपति जी बचपन में बहुत शरारती थे। 
एक बार नटखट गणपति कैलाश पर्वत पर खेल रहे थे, 
और पशु पंछियों को तंग कर रहे थे। 
यह सब माँ पार्वतीजी ने चुपके से देख लिया और मन में गणपति जी को सीख देने का विचार किया और माँ पार्वतीजी एक बिल्ली का रूप धारण कर गणपति जी के पास चली गईं। 
तभी गणपति जी की नज़र  उस बिल्ली पर पड़ी और उन्होंने उस बिल्ली को भी तंग करना आरंभ कर दिया। 
जिसके कारण उस बिल्ली को बहुत चोट आई।
थोड़े समय पश्चात गणपति जी को भूख लगी और वे माँ पार्वतीजी के पास गए। 
तब उन्होंने देखा माँ पार्वतीजी को बहुत चोट लगी हुई थी, 
उन्होंने माँ पार्वतीजी से चोट लगने का कारण पूछा। 
तब माँ पार्वतीजी ने उन्हें बताया की जब वे अपने मनोरंजन के लिए पशु पक्षियों को तंग कर रहे थे और उन्होंने जिस बिल्ली को तंग किया वह कोई और नहीं बल्कि स्वयं माँ पार्वतीजी खुद थीं। 
और उनके कारण जो चोट बिल्ली को लगी यह वही चोट है। 
यह सब सुनकर गणपति जी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माँ पार्वतीजी को वचन दिया के आज के बाद अपने मनोरंजन के लिए किसी जीव जंतु या किसी भी बेजुबान प्राणी को तंग नहीं करेंगे 

शिक्षा 
तो बच्चों इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है की हमें 
अपने मनोरंजन या अपने खेल के लिए किसी भी जीव जंतु या किसी भी बेजुबान प्राणी को परेशान नहीं करना चाहिए क्योंकि जिस तरह हमें  चोट लगती है उसी तरह उन्हें  भी चोट लगती है जैसे हम में प्राण हैं उसी प्रकार उनमे भी प्राण हैं। 

Shikha Sharma 

Wednesday, December 15, 2021

जनरल विपिन रावत जी उनकी पत्नी एवं अन्य सभी 11 वीर जवानों को इस गीत के माध्यम से श्रद्धांजलि🙏

न्यौछावर कर दिया तुमने, 
वतन की राह में तन मन। 

तिरंगे को किया ऊँचा, 
वतन की शान में तुमने। 

दिलों पर राज करते हो, 
के मर के भी अमर हो तुम। 

ये आँखें नम हैं हम सब की, 
जो सोया लाल भारत का। 

जो खोए लाल ऐसे ग़र, 
तो रोती है मेरी धरती। 

तड़पता है हिमालय ये, 
के रोई भूमि देवों की। 

मेरे श्रद्धा सुमन अर्पित, 
करूं में गीत से मेरे। 
Shikha Sharma 

सरहद के वीर

सरहद के वीर  अगर सरहद पे तुम हो तो,  यहां महफ़ूज़ हम सब हैं।  ना दहशत है कोई दिल में,  ना कोई खौफ़ है मन में।  हमारा ताज है तुमसे, वतन की शा...