Saturday, January 8, 2022

इम्तिहान

इम्तिहान 
सैलाब  भर  गया दिल में, 
अब कोई झूठा दिखावा किया नहीं जाता। 

आँखों से बहने  की जिद कर रहे, 
अब इन अश्कों को रोका नहीं जाता। 

थोड़ा तो रहम कर अब ऐ  जिंदगी, 
इस तरह जिंदगी का तमाशा बनते देखा नहीं जाता। 

ऐसा नहीं  के पहले कभी चोट लगी नहीं मुझे, 
पर अब इन घावों का दर्द सहा नहीं जाता। 

इम्तिहान जिंदगी के खत्म होते ही नहीं, 
अब मुझसे ये इम्तिहान दिया नहीं जाता। 

Shikha Sharma 
इस कविता का यूट्यूब वीडियो देखने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें 👇

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