सैलाब भर गया दिल में,
अब कोई झूठा दिखावा किया नहीं जाता।
आँखों से बहने की जिद कर रहे,
अब इन अश्कों को रोका नहीं जाता।
थोड़ा तो रहम कर अब ऐ जिंदगी,
इस तरह जिंदगी का तमाशा बनते देखा नहीं जाता।
ऐसा नहीं के पहले कभी चोट लगी नहीं मुझे,
पर अब इन घावों का दर्द सहा नहीं जाता।
इम्तिहान जिंदगी के खत्म होते ही नहीं,
अब मुझसे ये इम्तिहान दिया नहीं जाता।
Shikha Sharma
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