कई आगाज़ होते हैं, कई अंज़ाम होते हैं
कई आगाज़ होते हैं,
कई अंज़ाम होते हैं,
के इस दिल की तमन्ना में,
कई एहसास होते हैं।
भरोसे पर टिकी दुनिया,
भरोसे से ही चलती है,
भरोसा तोड़ दे कोई,
तो आंखे नम भी होती हैं।
यही है रीत जीवन की,
गिरते और संभलते हैं,
संभल के फिर से गिर जाना,
बड़ा ही दर्द देता है।
कई राहें हैं जीवन की,
यहां हंस के गुज़रना है,
गमों को छोड़कर पीछे,
हमे आगे निकलना है।
Shikha Sharma
Right
ReplyDeleteJi dhanyawad
Delete👍👍👍👍
ReplyDeleteThanks
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