Saturday, July 17, 2021

मासूम दोस्ती

 मासूम दोस्ती

सालो बाद ना जाने क्यों,
बचपन की वो मासूम दोस्ती,
          फिर से मुझको आई है याद।

नाम तेरा ना याद आया,
पर तेरी मासूम दोस्ती,
        फिर से मुझको आई है याद।

वो मेरे लिए तेरा,
सीट बचाना,
         फिर से मुझको आया है याद।

वो मेरा विद्या की पत्ती तोड़कर,
एक तेरे लिए एक मेरे लिए रखना,
          फिर से मुझको आया है याद।

वो फादर से तेरा डरना,
और मेरा सुजा़ मेम से डरना,
           फिर से मुझको आया है याद।

वो तेरा जीके में पिटना,
और मेरा ईवीएस में मुर्गा बनना,
              फिर से मुझको आया है याद।

फादर के ऑफिस में जाकर ओरल में,
तेरा मुझको धक्का देकर आगे करना,
                   फिर से मुझको आया है याद।

वो मेरा तेरे बाल खींचना,
 और तेरा मुंह बंदर सा लाल होजाना,
                 फिर से मुझको आया है याद।

वो तेरा बकबक करना,
और बहुत सी पहेलियां बुझना,
                 फिर से मुझको आया है याद।

एक दुजे को मिली पनिशमेंट पर,
एक दुजे को खूब चिढ़ाना,
                 फिर से मुझको आया है याद।

मेरे लिए भुरी बिल्ली से,
तेरा लड़जाना,
             फिर से मुझको आया है याद।

एक दुसरे को पीटकर भी,
टीचर से शिकायत ना करना,
              फिर से मुझको आया है याद।

वो छुट्टी में टिफिन निकालकर दोनों का गाना,
छुट्टी होने वाली है रेल का डिब्बा खाली है,
                     फिर से मुझको आया है याद।

अब ऐसी मासूम दोस्ती,
 फिर से कहां मिल पाएगी,
             ऐसी दोस्ती मुझको उम्र भर याद आएगी।

Shikha Sharma


         

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