हम सिर्फ हिन्दुस्तानी है
खुशबु है इस देश की,
अनेकता में एकता।
जात पात के नाम पर,
अब तुम लड़ना छोड़ दो।
रंग कई है देश के,
प्यारा है अपना भारत।
उच नीच का भेद ये,
अब तुम करना छोड़ दो।
जन्म से ऊंचा कोई नहीं,
जन्म से नीचा कोई नहीं।
होता है बस कर्म बड़ा,
अब तो ये तुम मान लो।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,
धर्म की ये ना परिभाषा है।
इंसानियत है धर्म बड़ा,
इंसान से इसका नाता है।
माना ये सब देन है,
गैर हुकूमत बालो की।
फुट डालकर राज करो,
ये उनकी ही तो साजिश थी।
पर हम तो हिन्दुस्तानी है,
हिन्दुस्तान में रहते हैं।
आपस में हो भाईचारा,
ये भी तो हम कहते हैं।
गैर हुकूमत बालों की,
पैरों की ये धूल है।
अब भी क्यों आजादी पर,
लगी हुई ये धूल है।
सारे झगड़े खत्म करो,
हम तो भाई भाई है।
चलो सपथ ले आज ये,
हम सिर्फ हिन्दुस्तानी है।
Shikha Sharma
बहुत ही सुंदर कविता मेरा भारत महान
ReplyDeleteइसका श्रेय तो आपको ही जाता है महाशय जी आपकी ही प्रेरणा से मैने ये रचना की है धन्यवाद 🙏
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