Saturday, July 31, 2021

सच्ची दोस्ती

 सच्ची दोस्ती

सच्ची हो दोस्ती तो,
जिंदगी जन्नत बन जाती है,
निभाना आए दोस्ती तो,
हर रिश्ते से खास दोस्ती बन जाती है।

दोस्त सिर्फ दोस्त नहीं,
हमराज होता है,
घरवालों की डांट में,
बराबर का हिस्सेदार होता है।

जब मूड हो ऑफ,
और शक्ल रोतली,
बना रखी हो आपने,
तब हसाने का हुनर सिर्फ दोस्त के पास होता है।

मिली हो पनिशमेंट स्कूल में,
उस पनिशमेंट में भी,
साथ देने के लिए,
सिर्फ दोस्त खड़ा होता है।

जब रास्ता कोई नज़र ना आता हो,
और दिल बहुत घबराता हो,
तब सच्चा दोस्त ही,
नया रास्ता  दिखाता है।

हसना हसाना दोस्तों का,
काम होता है,
एक दूसरे की टांग खींचना,
दोस्ती में आम होता है।

Happy friendship day to my all friends
Shikha Sharma

वैलेंटाइन की टूटी आश सावन में जागी फिर से (हास्य कविता)

 वैलेंटाइन की टूटी आश सावन में जागी फिर से (हास्य कविता)

प्रेम पत्र से काम चला ना,
जिनका वैलेंटाइन में,
बेलपत्र से काम चला रहे,
सावन के त्योहार में।

लगाकर चंदन मना रहे ये,
प्यारे भोले बाबा को,
सैटिंग पहले जो हो ना पाई,
अब भोले तुम करवादो।

सैटिंग भोले तो करवादे,
पर इसमें एक बाधा है,
राखी का त्यौहार भी प्यारे,
सावन में ही आता है।

बैंड चाहिए फ्रेंडशिप का,
या राखी की डोरी तुझको,
मै ना जानु बालक ये,
डिसाइड करना है तुझको।

तुझको हर पांच मिनट में,
सच्चा प्यार हो जाता है,
दिल है तेरा आखिर ये,
या कोई ट्रेन का डिब्बा है।

मुझको तू माफ करदे बच्चा,
इतनी सैटिंग मै ना करवा पाऊंगा,
कोई एक डिसाइड करले तु,
तो शायद मै कुछ कर पाऊंगा।

Shikha Sharma


Monday, July 26, 2021

मुझे ना कोख में मारो

मुझे ना कोख में मारो

मुझे ना कोख में मारो,
मुझे भी  जीने दो पापा,
नहीं  देखी  अभी दुनिया,
मुझे भी देखने दो ना।

क्यों दादी रूठी बैठी हो,
तुम्हारी ही तो पोती हुं,
तुम्हारी गोद में दादी,
मुझे भी खेलने दो ना।

मै तेरी कोख में हुं मां,
दया क्या तुझको ना आती,
मै तेरी ही तो लाडो हुं,
तेरी नन्ही सी शहजादी।

ये कैसी नफरतें बोलो,
मै भी संतान तुम्हारी हुं,
मिलेगा मारके मुझको,
बताओ ना तुम्हें भी क्या।

चलो माना में बेटी हुं,
मगर बेटे से ना कम हुं,
मुझे मौका तो दो पापा,
तुम्हारी शान बन जाऊं।

सुना है मैने ये पापा,
पूजते तुम तो देवी को,
वही देवी स्वरूपा हुं,
पाप क्यों ये कमाते हो।

रखे व्रत  तुमने नवरात्रे,
किया था कन्या पूजन भी,
जो बेटी को ही मारोगे,
कहां से पाओगे कन्या।


Shikha Sharma

Friday, July 23, 2021

गुरु वंदना

 गुरु वंदना

है नमन मेरा उन गुरु चरणन में,
जिसने हमको ज्ञान दिया,
               अंधकार मय इस जीवन को,
                उजयारे का दान दिया।

हमसे ज्यादा हमको जाना,
प्रतिभा को निखार दिया,
                अंधकार मय इस जीवन को,
                 उजयारे का दान दिया।

अनुशासन का पाठ पढ़ाकर,
जीवन का आधार दिया,
                     अंधकार मय इस जीवन को,
                      उजयारे का दान दिया।

लक्ष्य हमारा कैसे हम साधे,
इसका हमको ज्ञान दिया,
                    अंधकार मय इस जीवन को,
                     उजयारे का दान दिया।

कभी क्रोध किया तुमने तो,
कभी लाड़ दुलार किया,
                   अंधकार मय इस जीवन को,
                    उजयारे का दान दिया।

गुरु बिना तो ये जीवन बस,
केवल कोरा कागज़ है,
                 धन्य धन्य है गुरु जो तुमने,
                  शब्दों का निर्माण किया।



आज गुरु पूर्णिमा के शुभ अवसर पर
में अपनी गुरु को बहुत बहुत धन्यवाद 
करती हुं मेम अगर आप नहीं होते तो 
शायद में अपने आप को नहीं पहचान 
पाती काश मेरी ये कविता आप तक 
पहुंच जाए तो मेरा ये कविता लिखना
सफल होजाएगा आज में जो कुछ भी हुं
सिर्फ आपकी वजह से ही हुं।
Thankyou so much for everything
 tapasum mam

आप सभी को मेरी तरफ से गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं
Shikha Sharma


             

Thursday, July 22, 2021

कई अपने हमारे हैं

 कई अपने हमारे हैं

घिरे हम चारों ओरों से,
कई दुश्मन हमारे हैं,
हमे चोक्कन्ना रहना है,
कई अपने हमारे हैं।

किया क्या हमने ऐसा है,
जो हम आंखों में चुभते हैं,
हमारा दोष आखिर क्या,
हम ही अनजान इससे है।

जो कल तक कुछ ना करते थे,
बड़े अच्छे लगते थे,
कदम आगे बढ़ाया तो,
बुरे हम आज लगते हैं।

अभी खामोश हैं हम तो,
हमारी जंग जारी है,
मिलेगी जीत जिस दिन तो,
हमारी जीत बोलेगी।

जिन्हे अपना समझते थे,
मोखोटा वो तो पहने थे,
बड़े हम नासमझ थे पर,
समझ अब हमको आया है।

Shikha Sharma

Sunday, July 18, 2021

मेरे प्यारे दादाजी

 मेरे प्यारे दादाजी

काश मैने तुमको देखा होता,
प्यार तुम्हारा भी पाया होता,
मेरे प्यारे दादाजी थोड़ा सा वक्त,
मैने साथ तुम्हारे गुज़ारा होता।

होते गर तुम साथ हमारे,
तुम भी मुझको लाड़ लड़ाते,
मै कोई जिद् करती तो,
मेरी जिद् पूरी कर देते।

मुझको जब डांटते पापा,
तुम भी डांट देते पापा को,
मिलकर हम दादा पोती,
करते शरारतें प्यारी प्यारी।

करती हुं मैं शरारतें अब भी,
दादी से भी करती ठिठोली,
होते गर तुम दादाजी,
हम मिलकर दादी को चिढ़ाते।

देखे थे मैने भी सपने,
होते गर तुम साथ हमारे,
मुझको बिठा कर कंधो पर,
मेले की तुम सैर कराते।

हो तुम जहां भी प्यारे दादाजी,
मुझको देख रहे होगे,
इतनी सी मेरी ख्वाहिश है,
आशीष तुम्हारा साथ रहे।

Shikha Sharma

Saturday, July 17, 2021

मासूम दोस्ती

 मासूम दोस्ती

सालो बाद ना जाने क्यों,
बचपन की वो मासूम दोस्ती,
          फिर से मुझको आई है याद।

नाम तेरा ना याद आया,
पर तेरी मासूम दोस्ती,
        फिर से मुझको आई है याद।

वो मेरे लिए तेरा,
सीट बचाना,
         फिर से मुझको आया है याद।

वो मेरा विद्या की पत्ती तोड़कर,
एक तेरे लिए एक मेरे लिए रखना,
          फिर से मुझको आया है याद।

वो फादर से तेरा डरना,
और मेरा सुजा़ मेम से डरना,
           फिर से मुझको आया है याद।

वो तेरा जीके में पिटना,
और मेरा ईवीएस में मुर्गा बनना,
              फिर से मुझको आया है याद।

फादर के ऑफिस में जाकर ओरल में,
तेरा मुझको धक्का देकर आगे करना,
                   फिर से मुझको आया है याद।

वो मेरा तेरे बाल खींचना,
 और तेरा मुंह बंदर सा लाल होजाना,
                 फिर से मुझको आया है याद।

वो तेरा बकबक करना,
और बहुत सी पहेलियां बुझना,
                 फिर से मुझको आया है याद।

एक दुजे को मिली पनिशमेंट पर,
एक दुजे को खूब चिढ़ाना,
                 फिर से मुझको आया है याद।

मेरे लिए भुरी बिल्ली से,
तेरा लड़जाना,
             फिर से मुझको आया है याद।

एक दुसरे को पीटकर भी,
टीचर से शिकायत ना करना,
              फिर से मुझको आया है याद।

वो छुट्टी में टिफिन निकालकर दोनों का गाना,
छुट्टी होने वाली है रेल का डिब्बा खाली है,
                     फिर से मुझको आया है याद।

अब ऐसी मासूम दोस्ती,
 फिर से कहां मिल पाएगी,
             ऐसी दोस्ती मुझको उम्र भर याद आएगी।

Shikha Sharma


         

Thursday, July 15, 2021

बुरा है जमाना

 बुरा है जमाना

रहना है दुनिया में,
टेडे बन रहीएगा,
नहीं है जमाना,
आजकल सीधेपन का।

सीधे बन जाओगे तो,
धोके बड़े खाओगे,
दुनिया में रहकर,
जी नहीं पाओगे।

लोग दिखते हैं कुछ,
और कुछ करते हैं,
चेहरे यहां दो,
सबके ही हुआ करते हैं।

भोले मन पर सदा,
वार ये करते हैं,
मीठे बनकर बड़ा,
घाव दिया करते हैं।

ऐसे मीठेपन से,
सावधान रहिएगा,
बुरा है जमाना,
नासमझी ना करिएगा।

Shikha Sharma

Wednesday, July 14, 2021

ममता की छांव

 ममता की छांव

मां फिर से मुझको अपने,
आंचल की छांव देदे,
मुझको डरा रहीं हैं,
दुनिया की तीखी नजरें।

मेरे मन पे बोझ सा है,
और दिल में दर्द भी है,
तुफान सा उमड़ता,
इसे शांत तु करादे।

ममता में तेरी मां मै,
इस तरह खो जाऊं,
फिर और कुछ मेरी मां,
मुझे याद ही ना आए।

हर फ़िक्र से मेरी मां,
बेफिक्र मुझे करदे,
मै भुल जाऊं सबकुछ,
मुझे बाहों में तु भर ले।

तु डांटती भी है तो,
होता है प्यार तेरा,
पर मुझको सारी दुनिया,
क्यों आंख ही दिखाए।

बस तेरा प्यार सच्चा,
मां मै ये जानती हुं,
वरना तो यहां सबके,
दो चेहरे नज़र आएं।

तेरी ममता है ठंडी छाया,
और धूप दुनिया सारी,
मुझको ये छांव देदे,
मुझे धूप से बचाले।

Shikha Sharma

Monday, July 12, 2021

मंहगाई की मार युवा बेरोजगार

 मंहगाई की मार युवा बेरोजगार

मंहगाई ने तो,
आम जनता का दम तोड़ा,
मुश्किल हुआ है जीना,
अब आम जनता का।

दौड़ लगाए देखो,
पेट्रोल डीजल ये,
छलांग मारता है,
अब सरसों का तेल भी।

ऐसी महामारी आई,
बन्द करोबार हुआ,
कुछ ना समझ आए,
कैसा ये हाल हुआ।

भर भर थक गए,
फॉर्म सरकारी ये,
रोजगार मिला ना,
बेरोज़गारी मारे है।

पढ़ लिख कर ऐसे,
सपने सजाए थे,
बनना था कुछ और,
कुछ बन बैठे हैं।

पढ़ पढ़ डिग्रियां,
हमने इकट्ठी की,
आज लगाने को,
ठेला मजबूर हैं।

दर दर भटके हैं,
खूब सर पटके हैं,
अब भी हम, 
रोजगार पर ही अटके हैं।
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Shikha Sharma

Sunday, July 11, 2021

कई आगाज़ होते हैं, कई अंजाम होते हैं

 कई आगाज़ होते हैं, कई अंज़ाम होते हैं

कई आगाज़ होते हैं,
कई अंज़ाम होते हैं,
के इस दिल की तमन्ना में,
कई एहसास होते हैं।

भरोसे पर टिकी दुनिया,
भरोसे से ही चलती है,
भरोसा तोड़ दे कोई,
तो आंखे नम भी होती हैं।

यही है रीत जीवन की,
गिरते और संभलते हैं,
संभल के फिर से गिर जाना,
बड़ा ही दर्द देता है।

कई राहें हैं जीवन की,
यहां हंस के गुज़रना है,
गमों को छोड़कर पीछे,
हमे आगे निकलना है।

Shikha Sharma

Saturday, July 10, 2021

देश के सिपाही की अपनी बहन के लिए भावनाए

 देश के सिपाही की अपनी बहन के लिए भावनाए

रुलाता है ना जाने क्यों,
मुझे त्यौहार राखी का,
मेरी बहना तेरा भैया,
वतन का वो सिपाही है।

कलाई मेरी सुनी,
मगर तेरा प्यार तो हेना,
तेरे इस प्यार को मैने,
मेरे दिल में सजाया है।

मै आऊं या नहीं आऊं,
नहीं पल का भरोसा है,
कफ़न सर पे ये बांधा है,
वतन के नाम जीवन है।

जो आऊंगा लौटकर मै,
निभाऊंगा मै हर वादा,
जो देदू मै शहादत तो,
ना आंसू आंख में लाना।

वो दिन बचपन के रखना याद,
लड़ना और झगड़ना वो,
वो रूठना मनाना भी,
हमेशा याद रखना तु।

Shikha Sharma


Thursday, July 8, 2021

बाबा की गुडिया





 बाबा की गुडिया

ऊची भरूंगी मै तो,
ऐसी उड़ान एक दिन,
देखेगी सारी दुनिया,
 बाबा मुझे भी उस दिन।

हुं मजबूर आज लेकिन,
कल तो सवेरा होगा,
छ्ट जाएगा अंधेरा,
रोशन उजाला होगा।

एक दिन ये तेरी गुडिया,
आसमान भी छुएगी,
देखेगा तु भी एक दिन,
तेरी लाठी मै बनुगी।

मिटादुंगी गम सारे,
तेरी खुशियां मै बनुंगी,
मै गम का साया तुझपे,
पड़ने कभी ना दुंगी।

जिस दिन भी मै ओ बाबा,
होजाऊंगी सफल तो,
वादा है मेरा तुझसे,
तेरे गम समेट लूंगी।

हर संघर्ष मै करूंगी,
तकदीर से लडुंगी,
तेरे लिए मै बाबा,
हर गम भी सह लूंगी।

हारूंगी मै ना हिम्मत,
जब तक रहेंगी सांसे,
हालात के मै आगे,
डट के खड़ी रहूंगी।

ना सोचना कभी ये,
के कुछ ना मै करूंगी,
बिटिया हुं तेरी लेकिन,
तेरा बेटा मै बनुंगी।

बस साथ हो तेरा तो,
आसान राहें होंगी,
जो सर पे हाथ हो तो,
मंजिल मुझे मिलेगी

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Shikha Sharma

Wednesday, July 7, 2021

प्रेम मनोरथ

 प्रेम मनोरथ

ना चाहूं मै महल कोई,
ना चाहूं मै कोई गहना,
मेरा सम्मान तुम करना,
तुम ही तो हो मेरा गहना।

सजाऊंगी के जब भी में,
कभी ये मांग मेरी तो,
वफा के रंग से युंही,
सदा तुम मांग ये भरना।

मेरी सांसों में तो अब बस,
तुम्हारा नाम रहता है,
तुम्हारे दिल में भी मुझको,
जरा स्थान दे देना।

तुम्हारे गम मुझे देना,
मेरी खुशियां भी ले लेना,
मगर दुख सुख में तुम मेरे,
सदा साथी बने रहना।

उम्र ढलते ही एक दिन ये,
बदलजाएगी सूरत भी,
मगर सीरत से तुम मेरी,
चाहत सदा रखना।

नहीं हुं मैं बहुत ही,
खूबसूरत लेकिन,
मेरे मन की ये सुंदरता,
निगाहों में सदा रखना।

कभी दरिया जो अश्कों का,
बहेगा मेरी आंखों से,
सुनाकर तुम कोई किस्सा,
मुझे यूंही हंसा देना।

चलो माना ये राहें हैं,
मोहब्बत की बड़ी मुश्किल,
जो थामो हाथ तुम मेरा,
तो मंजिल आसान हो जाए।

मेरे गीतों में ग़ज़लों में,
तुम्हारा जिक्र होता है,
मेरे गीतों को बस तेरा,
एक साज़ मिल जाए।


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Shikha Sharma 

Tuesday, July 6, 2021

हम सिर्फ हिन्दुस्तानी है

 हम सिर्फ हिन्दुस्तानी है

खुशबु है इस देश की,
अनेकता में एकता।

जात पात के नाम पर,
अब तुम लड़ना छोड़ दो।

रंग कई है देश के,
प्यारा है अपना भारत।

उच नीच का भेद ये,
अब तुम करना छोड़ दो।

जन्म से ऊंचा कोई नहीं,
जन्म से नीचा कोई नहीं।

होता है बस कर्म बड़ा,
अब तो ये तुम मान लो।

हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई,
धर्म की ये ना परिभाषा है।

इंसानियत है धर्म बड़ा,
इंसान से इसका नाता है।

माना ये सब देन है, 
गैर हुकूमत बालो की।

फुट डालकर राज करो,
 ये उनकी ही तो साजिश थी।

पर हम तो हिन्दुस्तानी है,
हिन्दुस्तान में रहते हैं।

आपस में हो भाईचारा,
ये भी तो हम कहते हैं।

गैर हुकूमत बालों की,
पैरों की ये धूल है।

अब भी क्यों आजादी पर,
लगी हुई ये धूल है।

सारे झगड़े खत्म करो,
हम तो भाई भाई है।

चलो सपथ ले आज ये,
हम सिर्फ हिन्दुस्तानी है।

Shikha Sharma







Sunday, July 4, 2021

सोने का पिंजरा

सोने का पिंजरा

मै तेरे आंगन की चिड़िया,
आजाद फिरूं इस अंबर में।

तु है इस बगिया का माली,
मै हुं जैसे कोई फुलबारी।

बचपन से एक सुनी कहानी,
आयेगा एक दिन राजकुमार।

मुझको सुंदर से महलों में,
ले जाएगा वो राजकुमार।

पर जिसको तुमने महल कहा,
वो सोने का पिंजरा निकला।

रहती कैद में तेरी गुडिया,
अब सोने के पिंजरे में।

सजी धजी सी रहती हुं मैं, 
इन सोने के गहनों में।

पर तु क्या जाने मेरे बाबा,
ये तो सोने की जंजीरें है।

राजकुमार मिला महलों का,
पर वो दिल का ना शहजादा था।

मेरी कल्पनाओं में तो बाबा,
मैने चाहा घरौंदा दिल का था।

महल की इन ऊची दीवारों में,
वो प्यार कहीं ना बसता है।

होते हुए पंख अब ये पंछी,
इस सोने के पिंजरे में रहता है।

Shikha Sharma

Friday, July 2, 2021

उलझन


 उलझन

अजब उलझन चले मन में,
इसे सुलझाऊं मैं कैसे,
ना दिखता रास्ता कोई,
मंजिल पाऊं मैं कैसे।

चले मन में मेरे ये क्या,
ये मैं ही जानु ना,
मेरे उलझे सबालों के,
जवाब पाऊं मैं कैसे।

अजब सा खेल चल रहा,
मेरे जीवन की नैया में,
खिलौना खुद ही बन गए,
पार मै जाऊं तो कैसे।

चल रही जंग ये कैसी,
लड़ रही हुं मैं खुद से क्यों,
के ऐसी जंग में बोलो,
जीत जाऊं तो मैं कैसे।

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Shikha Sharma

Thursday, July 1, 2021

नारी का ईश्वर से सवाल

 नारी का ईश्वर से सवाल

मै पुछती हुं ईश्वर,
क्या दोष है मेरा ये,
नारी का जन्म पाके,
अपराध क्या किया है।

लिया जन्म जिस दिन,
बनकर के मैने बिटिया,
मातम सा छा गया था,
घर में भला क्यों उस दिन।

मै भी तो संतान हुं,
देन हुं तेरी ही,
फिर भेदभाव कैसा,
संसार में तेरे ये।

त्याग और समर्पण की,
मूरत मुझे बनाया,
फिर भी ना जाने मुझको,
क्यों संसार ने ठुकराया।

बनकर के फुलबारी,
इस तरह खिल रही थी,
मै बनके कोई खुशबु,
मेहका रही थी अंगना।

मै बड़ रहीं हुं आगे,
सम्मान वो मिला ना,
हकदार हुं मैं जिसकी,
स्थान वो मिला ना।

हर क्षेत्र में मैने तो,
नाम अपना किया है,
पर आज भी मै ईश्वर,
क्यों बोझ ही कहाऊं।

मै लड़ रही हुं अब तक,
अस्तित्व की लड़ाई,
अस्तित्व मेरा क्या है,
जरा मुझको ये बता दे।

कर कर के खुद को साबित,
अब मै तो थक रही हुं,
हर पथ पे मेरे ईश्वर,
मै दे रही परीक्षा।

तुने भला क्यों मुझको,
दो दो घरों में बांटा,
जब एक भी नहीं था,
कहने को मेरा अपना।

Shikha Sharma

सरहद के वीर

सरहद के वीर  अगर सरहद पे तुम हो तो,  यहां महफ़ूज़ हम सब हैं।  ना दहशत है कोई दिल में,  ना कोई खौफ़ है मन में।  हमारा ताज है तुमसे, वतन की शा...